8 अक्टूबर 1932 को गठित भारतीय वायु सेना(रायल एयरफोर्स) का प्रथम स्कावड्रन 1 अप्रैल 1933 को वेस्टलैंड वापाति बाईप्लेन युद्धक विमान से लैस हुआ। तब से अब तक इस सेना ने विभिन्न श्रेणी के कुल 1472 एयरक्राफ्ट खोया है। आजादी के पूर्व गठित दस स्क्वाड्रनों के कुल 446 विमान द्वितीय विश्व युद्ध एवं अन्य मिशन के दौरान मार गिराये गये या दुर्घटनाग्रस्त हुए जबकि 15 अगस्त 1947 के बाद भारतीय वायुसेना के कुल 1026 विमान उड़ान भरने के बाद वापस टार्मेक पर सलामत नहीं आये। इनमें मिग विमानों की संख्या सर्वाधिक 316 है।
01 अप्रैल 1933 को अविभाजित भारत में ब्रिटिश शासकों ने प्रथम स्कवाड्रन(फ्लाईग यूनिट)का गठन किया। तब इसे रायल एयरफोर्स का नाम मिला। द्वितीय विश्वयुद्ध में इस वायुसेना के पराक्रम के कायल ब्रिटिश हुक्मरानों ने इसे रायल इंडियन एयरफोर्स का नाम दिया। रायल एयरफोर्स का प्रथम विमान वापाति 04 सितंबर 1933 को दुर्घटनाग्रस्त हुआ। वर्ष 1947 तक फ्लाईग यूनिटों की संख्या 10 हो गयी। विभाजन के दौरान तीन फ्लाईग स्कवाड्रन पाक के अधीन हुए जबकि सात भारतीय वायुसेना के अंग बने रहे। बाद में जब भारत गणतंत्र के रूप में दुनिया के सामने आया, रायल शब्द को हटाकर इसका नाम भारतीय वायुसेना रखा गया। आजादी के बाद से अब तक वायुसेना के कुल 1026 विमान हादसों के शिकार हुए है। वर्ष 1970 से 2005 के बीच कुल 700 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए जिनमें 180 पायलट मारे गये। वर्ष 91-92 में 27 फाइटर प्लेन, 8 ट्रेनर, एक माल परिवहन एवं 3 हेलीकाप्टर क्रैश हुए।
इतिहास की दुर्भाग्यपूर्ण तिथियां
04 सितंबर 33 : रायल एयरफोर्स का प्रथम वापाति विमान क्रैश। पायलट थे पायलट आफिसर भूपेन्द्र सिंह
28 अगस्त 1947 : आजाद भारत में प्रथम एयरक्रैश। वायुसेना का टेम्पेस्ट विमान दुर्घटनाग्रस्त। पायलट थे स्क्वाड्रन लीडर मोहन देव सूरी।
22 नवंबर 63 : भारतीय वायुसेना का चेतक हेलीकाप्टर पुंछ नदी में दुर्घटनाग्रस्त। दोनों पायलट सहित एयर वाइस मार्शन ईडब्लू पिंटों, लेफ्टीनेंट जनरल दौलत सिंह, लेफ्टीनेंट जनरल विक्रम सिंह एवं एक ब्रिगेडियर की मौत।
6 सितंबर 1965 : भारत-पाक युद्ध के दौरान पठानकोट में मिस्टियर, नेट, मिग 21 जैसे दस विमान उड़ान भरने के पूर्व ही आपरेशनल रेडीनेस प्वांइट पर ही नष्ट कर दिये गये। इस दिन वायुसेना ने कुल 14 विमान खोया।
7 सितंबर 1965 : भारत पाक युद्ध के दौरान इस दिन वायुसेना के 15 विमान हादसों का शिकार।
8 अक्टूबर 89 : भारतीय वायुसेना के गठन समारोह में हवाई करतब के दौरान मिराज स्कवाड्रन के कमान अधिकारी विंग कमांडर आर बख्शी विमान सहित जमींदोज
आंकड़ों की नजर में दुर्घटनाएं
दुर्घटनाग्रस्त विमान संख्या
मिग-२१ 315
मिग-२३ 23
मिग-२५ 04
मिग-27 21
मिग-२९ 05
जगुआर 28
मिराज २००० ०३
04 अगस्त 2011
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस/वार्ता
नई दिल्ली। वायुसेना के 999 विमान 1970 के बाद से दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। इनमें से 34 फीसदी दुर्घटना पायलटों की गलती से हुई है। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को दी है।
वायुसेना के 946 मिग विमानों में से आधे से अधिक अब तक दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।
समिति द्वारा बजटीय मांग से सम्बंधित संसद में बुधवार को पेश की गई एक रिपोर्ट में कहा गया, "मंत्रालय ने एक लिखित जवाब में 1970 से अब तक हुई विमान दुर्घटनाओं का ब्योरा दिया है। इसके मुताबिक अक तक 999 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुक हैं।"
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इन 999 मामलों में से 12 की अभी जांच चल रही है, जबकि शेष 987 में से 388 मामले में चालक दल की गलती सामने आई है।
राजस्थान में हुए मिग लड़ाकू विमान की दुर्घटना होने और पायलट के मारे जाने की घटना के अगले ही दिन रक्षा संसदीय रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि मिग बेड़े के आधे से अधिक विमान हादसों में स्वाहा हो चुके हैं।
रक्षा मंत्रालय से संबद्ध संसद की स्थायी समिति की आज संसद में पेश रिपोर्ट में मंत्रालय के हवाले से यह स्वीकार किया गया है कि मिग विमानों की ज्यादातर दुर्घटनाएं पुरानी टेक्नोलाजी की वजह से हुई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि पुरानी पड़ चुकी टेक्नोलाजी के कारण मिग 21 और मिग 27 के इंजन में खराबी आने की घटनाएं आम हैं।
संसदीय समिति की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन विमानों की आपूर्ति करने वाले देश रूस ने भी इन्हें अपनी सेवा से बाहर कर दिया है और दुनिया में अकेली भारतीय वायुसेना ही है, जो इन विमानों पर अपना दावं लगाए हुए है।
समिति ने नए विमानों की खरीदारी की प्रक्रिया को योजनाबद्ध ढंग से पूरा करने की वकालत करते हुए मंत्रालय से कहा है कि मौजूदा विमानों के जीवनकाल को बढ़ाने तथा पायलटों की ट्रेनिंग पर नए सिरे से विचार किया जाए और मिग विमानों को जितना जल्दी संभव हो, रिटायर कर दिया जाए।
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मानवीय गलतियों में सुधार के पहलू के बारे में संसदीय समिति को बताया गया कि पायलटों की ट्रेनिंग के लिए समुचित ट्रेनर विमानों की उपलब्धता की कमी चिंता का विषय है।
इस समय वायुसेना के प्रशिक्षण विमानों के बेड़े में 114 एचपीटी, 96 किरण एमके-वन ए, 41 किरण एके-दो, 42 हॉक, 35 चेतक, 19 डोर्नियर, आठ एएन-32 परिवहन विमान और छह एवरो विमान हैं। अधिकांश ट्रेनरों में एचपीटी और किरण मार्क-1 एवं मार्क दो विमान हैं जिन्हें बदला जा रहा है।
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